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बीकानेर: अंतिम सेल्फी बनी छह चचेरे भाइयों की आखिरी याद, एक साथ जली 6 चिताएं, दिखी सभी की आंखें नम

India-1stNews




बीकानेर@ बारात में गए 6 चचेरे भाइयों की रास्ते में आइसक्रीम खाते हुए ली गई सेल्फी उनकी आखिरी याद बन गई। चार घंटे बाद ही एक्सीडेंट में सभी की मौत हो गई। बारात में खाना खाकर घर लौटते समय बुधवार रात करीब 11 बजे कार के ऊपर राख से भरा ट्रॉला पलट गया था। हादसा देशनोक आरओबी पर हुआ।

सोशल मीडिया पर हादसे की तस्वीर देखकर पड़ोसी ने नंबर से गाड़ी को पहचान लिया और वह मौके पर पहुंच गया। लेकिन, परिजन रातभर इस हादसे से बेखबर रहे। जहां बुधवार शाम तक खुशियों का माहौल था, वहां सुबह होते ही मातम पसर गया। सभी नोखा के रहने वाले थे।

हादसे में पप्पूराम (55) पुत्र गंगाराम और उनके भाई मूलचंद (45) निवासी मरोठी चौक, श्यामसुंदर (60) पुत्र चेतनराम व उनके भाई द्वारिका प्रसाद (45) निवासी पंचारिया चौक, करणीदान (50) पुत्र मोहनराम निवासी पंचारिया चौक और अशोक (45) पुत्र जगन्नाथ निवासी चाचा नेहरू स्कूल के पास मौत हो गई। नोखा में गुरुवार को एक साथ 6 भाइयों की अर्थी निकली। दोपहर करीब 3:30 बजे सभी का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया।नोखा के शांतिवन स्थित अंतिम विश्राम गृह में किया गया दाह संस्कार, पूर्व संसदीय सचिव केएल झंवर, पालिकाध्यक्ष नारायण झंवर, कांग्रेस नेता महेंद्र गहलोत, पूर्व विधायक बिहारी बिश्नोई, अतुल डूडी, डॉ. सीताराम पंचारिया सहित सर्व समाज के हजारों लोग शामिल हुए।



ट्रॉले के नीचे दब गई थी कार
बीकानेर आईजी ओमप्रकाश पासवान ने बताया- हादसे की सूचना मिलने पर देशनोक थाना पुलिस मौके पर पहुंची। राख से भरा ट्रॉला कार के ऊपर पलट गया था, जिससे कार में सवार सभी छह लोग नीचे दब गए थे। करीब आधे घंटे तक वे कार के अंदर फंसे रहे। कार पूरी तरह से पिचक चुकी थी।

जेसीबी की मदद से कार के ऊपर से ट्रॉला हटवाया गया। सभी 6 लोगों को बाहर निकाला। एंबुलेंस से चार को देशनोक सीएचसी और दो को बीकानेर के पीबीएम हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। रात में सभी शवों को हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में रखवाया गया। हादसे की सूचना के बाद कुछ रिश्तेदार भी मौके पर पहुंच गए। ट्रॉला ड्राइवर मौके से फरार हो गया था।

3 एंबुलेंस से घर पहुंचे शव
गुरुवार को पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए। शवों को तीन एंबुलेंस से नोखा के लिए रवाना किया गया। दोपहर करीब 1 बजे शव घर पहुंचते ही कोहराम मच गया।

इधर, स्थानीय लोगों ने मुआवजे की मांग को लेकर SMD गोपाल जांगिड़ को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया। वहीं, हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।

बुआ के बेटे की शादी में गए थे
पंचारिया चौक के पार्षद देवकिशन चांडक ने बताया- पप्पूराम के बुआ के बेटे की शादी थी। बुआ का घर पंचारिया चौक से करीब 150 मीटर की दूरी पर है। बुधवार शाम को बारात नोखा से देशनोक गई थी। अशोक की होंडा अमेज कार से सभी लोग नोखा से शाम करीब 6:30 बजे निकले थे।

हादसे से चार घंटे पहले ली थी सेल्फी
देशनोक के विश्वकर्मा भवन में शादी समारोह था। इससे पहले नोखा से 15 किलोमीटर दूर बीच रास्ते में बारात के लिए चाय-नाश्ते की व्यवस्था की गई थी। कार में सवार सभी लोग शाम करीब 6:45 बजे भामटसर पॉलिटेक्निक कॉलेज में रुके थे। इस दौरान आइसक्रीम खाते हुए सड़क किनारे खड़े होकर अशोक ने सभी के साथ एक सेल्फी ली थी।

भामटसर पॉलिटेक्निक कॉलेज में चाय-नाश्ता करने के बाद सभी लोग देशनोक स्थित विश्वकर्मा भवन में शादी समारोह में शामिल हुए। वहां खाना खाने के बाद वे कार से रात करीब 10:30 बजे घर के लिए निकले। निकलते ही करीब पांच किलोमीटर दूर करणी माता मंदिर के पास रेलवे क्रॉसिंग पर बने पुल पर एक ट्रॉला कार के ऊपर पलट गया।

2-2 सगे भाइयों की मौत
पार्षद देवकिशन चांडक ने बताया- श्यामसुंदर, द्वारिका, पप्पूराम, मूलचंद और अशोक, सुखाराम के पोते थे। वहीं, कालूराम उर्फ करणीदान भी उनका चचेरा भाई था, जिसके दादा का नाम माणुराम था।

अशोक के एक भाई की करीब 10 साल पहले एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। अब परिवार में कमाने वाला छोटा भाई बजरंग बचा है। उसी पर बच्चों की सारी जिम्मेदारी आ गई है।

पप्पूराम उर्फ लक्ष्मीनारायण और मूलचंद का भाई झंवरलाल (50) है। मूलचंद के 22 और 20 साल के दो बेटे हैं। पप्पूराम के एक बेटा और तीन बेटियां हैं।

श्यामसुंदर और द्वारिका प्रसाद का बड़ा भाई ओमप्रकाश (70) है। श्यामसुंदर के दो बेटे हैं। द्वारिका प्रसाद के दो बेटे और एक बेटी है।

करणीदान आमतौर पर बस से सफर करते थे। आसपास साइकिल से जाते थे। उनके तीन बेटियां और दो बेटे हैं।

पड़ोसी एडवोकेट रामनिवास बिश्नोई ने बताया- मैंने सोशल मीडिया पर हादसे की खबर देखी। गाड़ी का नंबर देखते ही मेरी सांसें अटक गईं। मैंने बिना देर किए परिवार को जानकारी दिए बगैर मौके पर जाने का फैसला किया। कुछ पड़ोसियों को भी साथ ले लिया।

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